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बुधवार व्रत कथा
बुध ग्रह की शांति, व्यापार में वृद्धि और बुद्धि प्रदाता पावन बुधवार व्रत कथा।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Ganesha नमः ॥
एक समय की बात है, मधुसूदन नाम का एक धनवान व्यक्ति अपनी पत्नी संगीता को विदा कराने अपनी ससुराल गया। कुछ दिन ससुराल में रहने के बाद उसने बुधवार के दिन पत्नी को विदा कराने का हठ किया।
ससुराल वालों ने उसे बहुत समझाया कि बुधवार के दिन किसी भी यात्रा या कन्या की विदाई करना शास्त्र विरुद्ध और अनिष्टकारी माना गया है, किन्तु उसने किसी की बात नहीं मानी और पत्नी को बैलगाड़ी में बैठाकर नगर के लिए चल पड़ा।
मार्ग में कुछ ही दूर जाने पर उसकी पत्नी को प्यास लगी। मधुसूदन पानी लेने चला गया। जब वह पानी लेकर लौटा, तो उसने देखा कि उसकी ही जैसी शक्ल और वेशभूषा वाला एक अन्य व्यक्ति उसकी पत्नी के पास बैठा है। दोनों में भीषण विवाद होने लगा। पत्नी भी चकित रह गई कि वास्तविक पति कौन है।
विवाद बढ़ते-बढ़ते राजा के दरबार में पहुंचा। राजा भी दोनों में भेद न कर सके। तब आकाशवाणी हुई— 'हे मधुसूदन! यह सब तुम्हारे बुधवार के दिन अनादर और यात्रा करने का फल है। यह बुध देव का ही प्रतिरूप है।' मधुसूदन ने हाथ जोड़कर बुध देव से क्षमा मांगी। बुध देव अंतर्ध्यान हो गए और मधुसूदन ने नियमपूर्वक बुधवार का व्रत करने का संकल्प लिया।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ
बुध ग्रह दोष की शांति, व्यापार में उन्नति और दांपत्य जीवन में सुख-शांति मिलती है।
विस्तृत सामग्री
एक समय की बात है, मधुसूदन नाम का एक धनवान व्यक्ति अपनी पत्नी संगीता को विदा कराने अपनी ससुराल गया। कुछ दिन ससुराल में रहने के बाद उसने बुधवार के दिन पत्नी को विदा कराने का हठ किया।
ससुराल वालों ने उसे बहुत समझाया कि बुधवार के दिन किसी भी यात्रा या कन्या की विदाई करना शास्त्र विरुद्ध और अनिष्टकारी माना गया है, किन्तु उसने किसी की बात नहीं मानी और पत्नी को बैलगाड़ी में बैठाकर नगर के लिए चल पड़ा।
मार्ग में कुछ ही दूर जाने पर उसकी पत्नी को प्यास लगी। मधुसूदन पानी लेने चला गया। जब वह पानी लेकर लौटा, तो उसने देखा कि उसकी ही जैसी शक्ल और वेशभूषा वाला एक अन्य व्यक्ति उसकी पत्नी के पास बैठा है। दोनों में भीषण विवाद होने लगा। पत्नी भी चकित रह गई कि वास्तविक पति कौन है।
विवाद बढ़ते-बढ़ते राजा के दरबार में पहुंचा। राजा भी दोनों में भेद न कर सके। तब आकाशवाणी हुई— 'हे मधुसूदन! यह सब तुम्हारे बुधवार के दिन अनादर और यात्रा करने का फल है। यह बुध देव का ही प्रतिरूप है।' मधुसूदन ने हाथ जोड़कर बुध देव से क्षमा मांगी। बुध देव अंतर्ध्यान हो गए और मधुसूदन ने नियमपूर्वक बुधवार का व्रत करने का संकल्प लिया।
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