श्री सत्यनारायण व्रत कथा
भगवान श्री सत्यनारायण की पावन व्रत कथा, विधि एवं महात्म्य। पूर्णिमा एवं संक्रांति पर पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
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भगवान श्री सत्यनारायण की पावन व्रत कथा, विधि एवं महात्म्य। पूर्णिमा एवं संक्रांति पर पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
पढ़ें →भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा बरसाने वाली पावन प्रदोष व्रत कथा। प्रत्येक मास के त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में पूजन एवं कथा का विधान।
पढ़ें →जीवन के अंतिम समय में भगवत-स्मरण की पावन प्रार्थना का अमर भजन।
न्यायाधिपति कर्मफलदाता भगवान शनिदेव का पावन प्रार्थना भजन।
माँ संतोषी के शुक्रवार व्रत की महिमा और पूजन विधि को वर्णित करता पावन भजन।
अर्थ: महान कीर्ति वाले इंद्रदेव हमारा कल्याण करें, सबके ज्ञाता पूषा देव हमारा कल्याण करें, गरुड़ देव हमारा कल्याण करें और देवगुरु बृहस्पति हमें शुभता प्रदान करें।
लाभ: पूजा व अनुष्ठानों की निर्विघ्न शुरुआत, अमंगल का नाश और सर्वकल्याण।
पढ़ें →अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु- ये सभी देव और नवग्रह मेरी सुबह को मंगलमय और शुभ बनाएं।
लाभ: दिन के सभी ग्रह दोष शांत होते हैं और पूरा दिन अनुकूल एवं सुखमय बीतता है।
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