सीधे सामग्री पर जाएँ
भगवान नृसिंह अवतार एवं भक्त प्रह्लाद कथा
← कथा पर जाएं

भगवान नृसिंह अवतार एवं भक्त प्रह्लाद कथा

खंभ चीरकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने वाले भगवान नृसिंह के अवतार की पावन कथा।

गीत / Lyrics

॥ श्री Lord Vishnu नमः ॥
वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार भगवान नृसिंह का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह न दिन में मरे न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न अस्त्र से न शस्त्र से, न मनुष्य से न पशु से। इस वरदान के अहंकार में उसने तीनों लोकों पर अत्याचार किए और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया। किन्तु उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान नारायण का अनन्य भक्त निकला। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को पहाड़ से गिराया, विष दिया, होलिका की अग्नि में बिठाया, किन्तु नारायण की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका न हुआ। क्रोधित होकर जब हिरण्यकशिपु ने खंभे में लात मारकर पूछा— 'बता तेरा भगवान कहां है?', तो उसी क्षण खंभे को चीरकर आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में भयंकर गर्जना करते हुए भगवान नृसिंह प्रकट हुए। प्रभु ने संध्या काल में, महल की देहरी पर, अपनी जांघों पर रखकर अपने तीक्ष्ण नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
ॐ ॐ ॐ
इन-आर्टिकल विज्ञापन

लाभ

घोर शत्रुओं पर विजय, भय से मुक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट निष्ठा की स्थापना।

विस्तृत सामग्री

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार भगवान नृसिंह का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह न दिन में मरे न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न अस्त्र से न शस्त्र से, न मनुष्य से न पशु से। इस वरदान के अहंकार में उसने तीनों लोकों पर अत्याचार किए और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया। किन्तु उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान नारायण का अनन्य भक्त निकला। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को पहाड़ से गिराया, विष दिया, होलिका की अग्नि में बिठाया, किन्तु नारायण की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका न हुआ। क्रोधित होकर जब हिरण्यकशिपु ने खंभे में लात मारकर पूछा— 'बता तेरा भगवान कहां है?', तो उसी क्षण खंभे को चीरकर आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में भयंकर गर्जना करते हुए भगवान नृसिंह प्रकट हुए। प्रभु ने संध्या काल में, महल की देहरी पर, अपनी जांघों पर रखकर अपने तीक्ष्ण नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
HINDI Pauranik Katha Lord Vishnu 14:30
2 पठित 0 पसंद 0 शेयर

संबंधित सामग्री

Comments (0)

Loading comments...

0/2000