सीधे सामग्री पर जाएँ
प्रदोष व्रत कथा
← कथा पर जाएं

प्रदोष व्रत कथा

भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा बरसाने वाली पावन प्रदोष व्रत कथा। प्रत्येक मास के त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में पूजन एवं कथा का विधान।

गीत / Lyrics

॥ श्री Lord Shiva नमः ॥
जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे । हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ ॐ ॐ
इन-आर्टिकल विज्ञापन

संस्कृत पाठ

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

Transliteration

Karpura Gauram Karunavataram Samsarasaram Bhujagendra Haram | Sada Vasantam Hridayaravinde Bhavam Bhavani Sahitam Namami ||

अर्थ

कपूर के समान गौर वर्ण वाले, करुणा के साक्षात अवतार, संसार के सार और भुजंगों का हार धारण करने वाले, माता भवानी सहित भगवान शिव के चरणों में कोटिशः नमन है।

लाभ

प्रदोष व्रत का निष्ठापूर्वक पालन करने से सभी प्रकार के ग्रह दोष, शारीरिक व्याधियां, मानसिक अशांति और ऋणभार समाप्त होते हैं। मोक्ष एवं शिवलोक की प्राप्ति होती है।

कैसे जपें

त्रयोदशी तिथि को प्रातः स्नान कर निर्जल या फलाहार व्रत का संकल्प लें। सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व एवं 45 मिनट पश्चात (प्रदोष काल) में भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भस्म से पूजन करें। कथा का श्रवण कर आरती करें।

विस्तृत सामग्री

पौराणिक आख्यानों के अनुसार, एक समय की बात है, एक नगर में एक अत्यंत धर्मपरायण ब्राह्मण निवास करता था। उसकी मृत्यु के उपरांत उसकी साध्वी पत्नी और छोटा पुत्र अत्यंत निर्धन हो गए। ब्राह्मणी भिक्षा मांगकर अपने बालक का भरण-पोषण करती थी। एक दिन भिक्षा मांगकर लौटते समय ब्राह्मणी को विदर्भ देश का एक घायल राजकुमार मिला, जिसके पिता का राज्य शत्रुओं ने छीन लिया था। दयालु ब्राह्मणी ने उस राजकुमार को भी अपने पुत्र के समान आश्रय दिया। कुछ समय पश्चात वे दोनों बालक शांडिल्य ऋषि के आश्रम पहुंचे। महर्षि शांडिल्य ने दोनों बालकों और ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत का विधान और भगवान शिव के पूजन का महात्म्य बताया। ऋषि के आदेशानुसार ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने प्रत्येक त्रयोदशी को श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत करना प्रारंभ किया। प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक और स्तुति की। व्रत के प्रभाव से गंधर्व कन्या अंशुमती से राजकुमार का विवाह हुआ और गंधर्वों की सहायता से उसने अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त किया। राजकुमार ने उस दरिद्र ब्राह्मण बालक को अपना प्रधानमंत्री बनाया। भगवान शिव के प्रदोष व्रत के पुण्य प्रताप से उन सभी का जीवन सुख, वैभव और आध्यात्मिक आनंद से भर गया।
HINDI Vrat Katha Lord Shiva
2 पठित 0 पसंद 0 शेयर

संबंधित सामग्री

Comments (0)

Loading comments...

0/2000