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शनिवार व्रत कथा
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शनिवार व्रत कथा

कर्मफलदाता भगवान शनिदेव के न्याय और राजा विक्रमादित्य के धैर्य की अमर कथा।

गीत / Lyrics

॥ श्री Lord Shani नमः ॥
एक बार नवग्रहों में विवाद हुआ कि हममें सबसे श्रेष्ठ कौन है? निर्णय के लिए वे देवराज इंद्र के पास गए। इंद्र ने कहा कि उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य इसका निष्पक्ष निर्णय कर सकते हैं। राजा विक्रमादित्य ने नौ धातुओं के सिंहासन बनवाए और ग्रहों से अपनी इच्छानुसार बैठने को कहा। शनिदेव का सिंहासन लोहे का था और सबसे पीछे था। शनिदेव रुष्ट हो गए और बोले— 'हे राजा! तुमने मुझे सबसे नीचा दिखाया है, तुम मेरी वक्र दृष्टि का फल भोगोगे।' साढ़ेसाती आने पर राजा विक्रमादित्य पर घोर संकट आए। उनका सुंदर घोड़ा उन्हें बीहड़ जंगल में ले गया, जहां एक व्यापारी ने उन पर चोरी का आरोप लगा दिया। राजा के हाथ-पैर कटवा दिए गए और वे एक तेली के कोल्हू पर बैल की तरह चलने लगे। घोर कष्ट में भी राजा ने धैर्य नहीं खोया और शनिवार को शनिदेव की स्तुति में दीपक जलाकर गीत गाया। शनिदेव प्रसन्न हुए, राजा के हाथ-पैर पुनः जुड़ गए और उनका राज्य ससम्मान वापस मिला।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ

शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और जीवन के घोर संकटों से मुक्ति मिलती है।

विस्तृत सामग्री

एक बार नवग्रहों में विवाद हुआ कि हममें सबसे श्रेष्ठ कौन है? निर्णय के लिए वे देवराज इंद्र के पास गए। इंद्र ने कहा कि उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य इसका निष्पक्ष निर्णय कर सकते हैं। राजा विक्रमादित्य ने नौ धातुओं के सिंहासन बनवाए और ग्रहों से अपनी इच्छानुसार बैठने को कहा। शनिदेव का सिंहासन लोहे का था और सबसे पीछे था। शनिदेव रुष्ट हो गए और बोले— 'हे राजा! तुमने मुझे सबसे नीचा दिखाया है, तुम मेरी वक्र दृष्टि का फल भोगोगे।' साढ़ेसाती आने पर राजा विक्रमादित्य पर घोर संकट आए। उनका सुंदर घोड़ा उन्हें बीहड़ जंगल में ले गया, जहां एक व्यापारी ने उन पर चोरी का आरोप लगा दिया। राजा के हाथ-पैर कटवा दिए गए और वे एक तेली के कोल्हू पर बैल की तरह चलने लगे। घोर कष्ट में भी राजा ने धैर्य नहीं खोया और शनिवार को शनिदेव की स्तुति में दीपक जलाकर गीत गाया। शनिदेव प्रसन्न हुए, राजा के हाथ-पैर पुनः जुड़ गए और उनका राज्य ससम्मान वापस मिला।
HINDI Vrat Katha Lord Shani 15:30
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