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स्वस्ति वाचन वैदिक मंत्र
ऋग्वेद का सर्वकल्याणकारी स्वस्ति वाचन मंत्र, जो चारों दिशाओं से मंगल लाता है।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Ganesha नमः ॥
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः॥
ॐ ॐ ॐ
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संस्कृत पाठ
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः॥
Transliteration
Om Swasti Na Indro Vriddhashravaah Swasti Nah Pooshaa Vishvavedaah, Swasti Nas Taarkshyo Arishtanemih Swasti No Brihaspatir Dadhaatu.
अर्थ
महान कीर्ति वाले इंद्रदेव हमारा कल्याण करें, सबके ज्ञाता पूषा देव हमारा कल्याण करें, गरुड़ देव हमारा कल्याण करें और देवगुरु बृहस्पति हमें शुभता प्रदान करें।
लाभ
पूजा व अनुष्ठानों की निर्विघ्न शुरुआत, अमंगल का नाश और सर्वकल्याण।
कैसे जपें
किसी भी पूजन, हवन या गृह प्रवेश के शुभारंभ पर ब्राह्मण या यजमान द्वारा पाठ किया जाता है।
विस्तृत सामग्री
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः॥
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