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निर्जला एकादशी व्रत कथा
समस्त चौबीस एकादशियों का पुण्य फल प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ निर्जला एकादशी कथा।
गीत / Lyrics
॥ श्री Lord Vishnu नमः ॥
महाभारत काल में एक बार पाण्डुपुत्र भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास जी से कहा— 'हे पितामह! युधिष्ठिर, माता कुंती, द्रौपदी और मेरे सभी भाई प्रत्येक एकादशी को उपवास करते हैं और मुझसे भी कहते हैं। किन्तु मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है, जिससे मैं भूख सहन नहीं कर सकता। कृपया ऐसा कोई व्रत बताइए जिससे मुझे बिना भूखे रहे वर्ष की समस्त चौबीस एकादशियों का फल प्राप्त हो सके।'
व्यास जी ने कहा— 'हे वृकोदर! ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो। इस दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। केवल आचमन में छः बूंद जल लिया जाता है। जो मनुष्य इस एक एकादशी को पूर्ण निर्जल रहकर करता है, उसे वर्ष की सभी एकादशियों का पूर्ण पुण्य फल एक साथ प्राप्त हो जाता है और वह अंत में विष्णुलोक को जाता है।'
भीमसेन ने साहसपूर्वक इस कठिन व्रत का पालन किया, जिसके कारण इसे 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है।
ॐ ॐ ॐ
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लाभ
साल की समस्त 24 एकादशियों का फल, मोक्ष और पापों का समूल नाश।
विस्तृत सामग्री
महाभारत काल में एक बार पाण्डुपुत्र भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास जी से कहा— 'हे पितामह! युधिष्ठिर, माता कुंती, द्रौपदी और मेरे सभी भाई प्रत्येक एकादशी को उपवास करते हैं और मुझसे भी कहते हैं। किन्तु मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है, जिससे मैं भूख सहन नहीं कर सकता। कृपया ऐसा कोई व्रत बताइए जिससे मुझे बिना भूखे रहे वर्ष की समस्त चौबीस एकादशियों का फल प्राप्त हो सके।'
व्यास जी ने कहा— 'हे वृकोदर! ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो। इस दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। केवल आचमन में छः बूंद जल लिया जाता है। जो मनुष्य इस एक एकादशी को पूर्ण निर्जल रहकर करता है, उसे वर्ष की सभी एकादशियों का पूर्ण पुण्य फल एक साथ प्राप्त हो जाता है और वह अंत में विष्णुलोक को जाता है।'
भीमसेन ने साहसपूर्वक इस कठिन व्रत का पालन किया, जिसके कारण इसे 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है।
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