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श्री सत्यनारायण व्रत कथा
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श्री सत्यनारायण व्रत कथा

भगवान श्री सत्यनारायण की पावन व्रत कथा, विधि एवं महात्म्य। पूर्णिमा एवं संक्रांति पर पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

गीत / Lyrics

॥ श्री Lord Vishnu नमः ॥
सत्यनारायण आरती: जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥ रत्नजड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे । नारद ध्यान लगावे, ध्यावत सुर काजे ॥ प्रकट भये कलिकाल में, द्विज को दरश दियो । बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥
ॐ ॐ ॐ
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संस्कृत पाठ

सत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये । सत्यस्य सत्यमृतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं त्वां शरणं प्रपन्नाः ॥

Transliteration

Satyavratam Satyaparam Trisatyam Satyasya Yonim Nihitam Cha Satye | Satyasya Satyam Ritasatya Netram Satyatmakam Tvam Sharanam Prapannah ||

अर्थ

जो सत्य के व्रत का पालन करने वाले हैं, सत्य ही जिनका परम धाम है, जो भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों में सत्य हैं, हम उन सत्यात्मक परमेश्वर भगवान श्री सत्यनारायण की शरण में हैं।

लाभ

श्री सत्यनारायण कथा के श्रवण एवं पठन से दरिद्रता का नाश होता है, पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि होती है, कार्य में सफलता मिलती है तथा समस्त पापों का शमन होता है।

कैसे जपें

पूर्णिमा, गुरुवार या संक्रांति के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। ईशान कोण में चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर कलश व भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें। पंजीरी (आटे का भुना प्रसाद), केले, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। कथा समाप्ति पर आरती कर प्रसाद वितरण करें।

विस्तृत सामग्री

भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा स्कंद पुराण के रेवाखंड से ली गई है। प्रथम अध्याय: एक समय नैमिषारण्य तीर्थ में शौनक आदि अट्ठासी हजार ऋषियों ने परम पूज्य सूत जी महाराज से पूछा—"हे मुनिश्रेष्ठ! संसार में मनुष्य अपने दुखों, कष्टों तथा दारिद्र्य से किस प्रकार मुक्ति पा सकता है? कोई ऐसा सरल एवं फलदायी व्रत बताएं जिससे सर्वमनोकामनाएं पूर्ण हों।" सूत जी ने कहा—"हे ऋषियों! एक बार यही प्रश्न देवर्षि नारद जी ने भगवान नारायण से पूछा था। तब भगवान श्री हरि विष्णु ने कृपापूर्वक इस सत्यनारायण व्रत का रहस्य प्रकट किया था।" भगवान ने कहा—"सत्यनारायण का व्रत अत्यंत दुर्लभ और शीघ्र फलदायी है। जो मनुष्य श्रद्धा एवं भक्ति से इस व्रत को करता है, वह इस लोक में सभी सुख भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है।" द्वितीय अध्याय: काशी नगरी में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण भिक्षा मांगकर जीवन यापन करता था। उसकी भक्ति देखकर भगवान विष्णु ने एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर दर्शन दिए और सत्यनारायण व्रत करने की विधि बताई। ब्राह्मण ने श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लिया और विधि-विधान से पूजन कर कथा श्रवण की। भगवान सत्यनारायण की कृपा से वह धन-धान्य, आरोग्य और सभी सांसारिक सुखों से संपन्न हो गया। उसी समय एक काष्ठविक्रेता (लकड़हारा) प्यासा होकर वहां आया। उसने कथा सुनी, चरणामृत व प्रसाद ग्रहण किया और उसने भी व्रत करने का संकल्प लिया। उसकी सारी दरिद्रता दूर हुई और वह परम पद को प्राप्त हुआ।
HINDI Satyanarayan Katha Lord Vishnu
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