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सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये
देवी भागवत एवं दुर्गा सप्तशती का अत्यंत मंगलकारी एवं कल्याणप्रद श्लोक।
गीत / Lyrics
॥ श्री Goddess Durga नमः ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
ॐ ॐ ॐ
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संस्कृत पाठ
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
Transliteration
Sarva Mangala Maangalye Shive Sarvaartha Saadhike, Sharanye Tryambake Gauri Naaraayani Namo-stu Te.
अर्थ
सब मंगलों में मंगल रूप, कल्याणकारी, समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण देने योग्य, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी, आपको नमस्कार है।
लाभ
घर में सर्वमंगल, दांपत्य सुख, शांति और समस्त शुभ कार्यों की सिद्धि होती है।
कैसे जपें
नित्य पूजा के समय देवी के सम्मुख घी का दीपक जलाकर 11 या 21 बार जपें।
विस्तृत सामग्री
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
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